Dharmendra Death : धर्मेंद्र यांचे कधीच न विसरता येणार डायलॉग
गांव वालों, तुमको मेरा आखरी सलाम… अखेर वयाच्या 90 व्या वर्षी धर्मेंद्र यांनी अखेरचा श्वास घेतला... धर्मेंद्र यांच्या निधनाने फक्त कुटुंबियांनाच नाही तर, चाहत्यांना देखील मोठी धक्का बसला आहे... त्यांचे अनेक डायलॉग सध्या चर्चेत आले आहेत... धर्मेंद्र यांनी सिनेविश्वातील एक काळ गाजवला होता...

'वेन आई डेड, पुलिस कमिंग… पुलिस कमिंग, बुढ़िया गोइंग जेल… इन जेल बुढ़िया चक्की पीसिंग, एंड पीसिंग, एंड पीसिंग, एंड पीसिंग, एंड पीसिंग...', 'मर्द का खून और औरत के आसूं जब तक न बहे… उनकी कीमत नहीं लगायी जा सकती...'

'ये दुनिया बहुत बुरी है शांति, जो कुछ देती है बुरा बनने के बाद देती है...', 'किसी भी भाषा का मज़ाक उड़ाना घटियापन है और मैं वही कर रहा हूं...'

'उमा जी, शायद आपने खुद को कभी हंसते हुए नहीं देखा। कभी छुपके से सामने आकर देखो और देखो ये हंसी कितनी खूबसूरत है...', 'बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना...'

'कुत्ते, कमीने, मैं तेरे खून पी जाउंगा...', 'पहले एक हिंदुस्तानी को समझ जाओ, हिंदी अपने आप आ जाएगी...', 'दिल भी कोई चीज है जो हर किसी को दे दूं...'

'जिसने मोहब्बत की वो डर नहीं सकता...', 'हम प्यार में हारकर भी जीत जाते हैं...', “गांव वालों, तुमको मेरा आखरी सलाम… गुडबाय... इस स्टोरी में इमोशन है, ड्रामा है, ट्रेजेडी है…” असे अनेक डायलॉग आजही चाहत्यांच्या मनात आहेत...